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6 Mukhi Rudraksha (Six Mukhi - 6 मुखी रुद्राक्ष)

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6 मुखी रुद्राक्ष क्या है? (6 Mukhi Rudraksha Kya Hai)

छह मुखी रुद्राक्ष (6 Mukhi Rudraksha) एक पवित्र और प्रभावशाली रुद्राक्ष माना जाता है, जो भगवान शिव के पुत्र भगवान कार्तिकेय का प्रतीक है। भगवान कार्तिकेय को साहस, ज्ञान और युद्ध कौशल का देवता माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस रुद्राक्ष का संबंध शुक्र ग्रह (Venus) से भी माना जाता है, जो जीवन में सुख, आकर्षण, सौंदर्य और ऐश्वर्य का प्रतिनिधित्व करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 6 मुखी रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के जीवन में आत्मविश्वास, बुद्धि और मानसिक संतुलन बढ़ता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है जो शिक्षा, कला, वक्तृत्व या रचनात्मक कार्यों से जुड़े होते हैं। विद्यार्थियों, वक्ताओं और कलाकारों के लिए यह रुद्राक्ष काफी लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह सीखने की क्षमता और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है।

6 मुखी रुद्राक्ष के मुख्य लाभ (6 Mukhi Rudraksha Benefits in Hindi)

शिक्षा और करियर में सहायता

6 मुखी रुद्राक्ष को विद्यार्थियों और ज्ञान प्राप्त करने वाले लोगों के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इसे धारण करने से मानसिक शक्ति बढ़ने और पढ़ाई में एकाग्रता आने की मान्यता है। जिन छात्रों को पढ़ाई के समय ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है, उनके लिए यह रुद्राक्ष सहायक माना जाता है।

इसके अलावा यह व्यक्ति की समझ और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है, जिससे शिक्षा और करियर दोनों में सफलता प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रेम और आकर्षण में वृद्धि

क्योंकि 6 मुखी रुद्राक्ष का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है, इसलिए इसे प्रेम, आकर्षण और भावनात्मक संतुलन से भी जोड़ा जाता है। शुक्र ग्रह जीवन में सौंदर्य, कला, प्रेम और विलासिता का कारक माना जाता है।

इस रुद्राक्ष को धारण करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ने और रिश्तों में संतुलन आने की मान्यता है। यह भावनात्मक स्थिरता बनाए रखने और रिश्तों को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है।

स्वास्थ्य संबंधी लाभ

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार 6 मुखी रुद्राक्ष कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में भी सहायक माना जाता है। इसे विशेष रूप से गले और मुंह से जुड़ी समस्याओं, थायराइड से संबंधित परेशानियों और शरीर के हार्मोनल संतुलन के लिए उपयोगी बताया जाता है।

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यह मधुमेह और मोटापे के प्रबंधन में सहायक हो सकता है क्योंकि यह शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है। हालांकि इसे किसी चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं माना जाता।

सुख और समृद्धि का प्रतीक

शुक्र ग्रह से संबंधित होने के कारण 6 मुखी रुद्राक्ष को जीवन में सुख, विलासिता और समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने और आर्थिक स्थिरता आने की मान्यता है।

यह रुद्राक्ष व्यक्ति को आत्मविश्वास और संतुलन प्रदान करता है, जिससे वह अपने जीवन के लक्ष्य को बेहतर तरीके से प्राप्त कर सकता है।

6 मुखी रुद्राक्ष धारण करने की विधि (6 Mukhi Rudraksha Dharan Karne ki Vidhi)

6 मुखी रुद्राक्ष को सही विधि से धारण करना शुभ माना जाता है ताकि इसका प्रभाव अधिक मिल सके। सामान्यतः इसे सोमवार के दिन धारण करना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है।

धारण करने से पहले रुद्राक्ष को गंगाजल या स्वच्छ जल से धोकर शुद्ध किया जाता है। इसके बाद भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय का ध्यान करते हुए मंत्र जाप किया जाता है।

धारण करते समय इन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है:
ॐ ह्रीं हुम नमः
या
ॐ कार्तिकेयाय नमः

मंत्र का लगभग 108 बार जाप करने के बाद रुद्राक्ष को गले में धारण किया जा सकता है। इसे लाल या पीले धागे में पहनना अच्छा माना जाता है। कुछ लोग इसे सोने या चांदी की चेन में भी पहनते हैं।

धारण करते समय सावधानियां

रुद्राक्ष को पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे पहनते समय कुछ नियमों का पालन करना अच्छा माना जाता है। सामान्यतः रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। कई परंपराओं में मांसाहार और मदिरा से दूर रहने की बात भी कही जाती है।

यदि किसी कारण से रुद्राक्ष टूट जाए या फट जाए, तो उसे धारण नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में उसे किसी पवित्र नदी, विशेष रूप से गंगा में प्रवाहित करने की परंपरा है और उसके स्थान पर नया रुद्राक्ष धारण किया जाता है।

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